मैं मुनक्कश (अंकित) हूं तेरी रूह के दरवाजों परतू मिटा सकता नहीं भूलने वाले मुझको।
नज़दीक बहुत गर रहे, बन जाओगे आदत
ये सोच के, मिलने तुम्हें अक्सर नहीं आते